भारत का ‘टाइगर स्टेट’ कहे जाने वाले मध्यप्रदेश में एक ही हफ्ते में दो ऐसी घटनाएं सामने आईं, जिन्होंने जंगल से लेकर न्यायालय तक सनसनी फैला दी. एक ओर अंतरराष्ट्रीय बाघ तस्करी सिंडिकेट के तीन अहम किरदारों को चार-चार साल की सजा सुनाई गई, वहीं दूसरी ओर बाघों की लगातार हो रही मौतों पर हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए सीधी निगरानी शुरू कर दी.
नर्मदापुरम की विशेष अदालत ने विदिशा के कुख्यात आरोपी आदिन सिंह उर्फ कल्ला बावरिया, पंजाब के पुजारी सिंह और असम की रिंदिक तेरोनपी को चार-चार साल की सजा और 25-25 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई.
ये तीनों एक अंतरराष्ट्रीय बाघ शिकार और तस्करी गिरोह के सक्रिय सदस्य बताए गए हैं. लेकिन, इन सजाओं के बीच एक कड़वी सच्चाई भी सामने आई है कि बाघ मर रहे हैं और उन्हें मारने वाले नेटवर्क पहले से कहीं ज्यादा संगठित और गहरे जमे हुए हैं.