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कॉर्पोरेट: बालको ने विश्व जल दिवस पर चलाया सामुदायिक जल संचय अभियान

इस पहल से समुदाय के लोगों को आजीविका के नए अवसर भी मिले हैं। इस कार्यक्रम के तहत 80 किसानों ने मछली पालन को अतिरिक्त आय के रूप में अपनाया है। इससे उन्हें हर फसल चक्र में औसतन ₹20 हजार की कमाई हो रही है। इससे पानी के संसाधनों का बेहतर उपयोग करते हुए उनकी आर्थिक स्थिति भी मजबूत हुई है।

बालकोनगर । वेदांता समूह की कंपनी भारत एल्यूमिनियम कंपनी लिमिटेड (बालको) ने विश्व जल दिवस के अवसर पर ‘मोर जल मोर माटी’ परियोजना के अंतर्गत तालाब पुनर्जीवित अभियान का आयोजन किया। इस पहल में 150 से अधिक कर्मचारी और स्थानीय समुदाय के लोग शामिल हुए, जिन्होंने पारंपरिक जल स्रोतों के संरक्षण और सतत जल उपयोग के प्रति जागरूकता बढ़ाने में योगदान दिया। यह पहल जल प्रबंधन और पर्यावरण संरक्षण के प्रति बालको की प्रतिबद्धता को दर्शाती है।

इन प्रयासों से अब तक 40 से अधिक गांवों में जल संरक्षण संरचनाएं विकसित और पुनर्जीवित की जा चुकी हैं, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में जल उपलब्धता बढ़ी है और खेती को मजबूती मिली है। साथ ही परियोजना के तहत कुल 158 जल संरचनाएं बनाई गई हैं, जिनमें 129 खेत तालाब, 15 सामुदायिक तालाब, 12 चेक डैम और 2 लाइनिंग तालाब शामिल हैं। इनकी कुल जल संग्रहण क्षमता 2.30 लाख घन मीटर से अधिक है। वित्त वर्ष 2025-26 में ही 22 नई संरचनाएं (21 खेत तालाब और 1 सामुदायिक तालाब) बनाई गई हैं, जिनकी कुल क्षमता लगभग 22 हजार घन मीटर है।


इन जल संरचनाओं से किसानों को सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी मिल रहा है, जिससे वे अब केवल बारिश पर निर्भर नहीं हैं। किसान अब साल में कई फसलें उगा पा रहे हैं और अपनी आय में भी वृद्धि कर रहे हैं। साथ ही, पशुपालन के लिए भी पानी की उपलब्धता बेहतर हुई है।

इस पहल का असर बताते हुए कोरबा के पास भाटगांव की किसान संध्या बाई ने कहा कि मैं हमेशा मछली पालन और सब्जी खेती के जरिए अपनी आय बढ़ाना चाहती थी। ‘मोर जल मोर माटी’ योजना के तहत खेत में तालाब बनने से मैं दोनों काम कर पा रही हूं। इससे मेरे परिवार की आय में बढ़ोतरी हुई है और अब घर की आर्थिक स्थिति सुधार हुआ है।

इस पहल से समुदाय के लोगों को आजीविका के नए अवसर भी मिले हैं। इस कार्यक्रम के तहत 80 किसानों ने मछली पालन को अतिरिक्त आय के रूप में अपनाया है। इससे उन्हें हर फसल चक्र में औसतन ₹20 हजार की कमाई हो रही है। इससे पानी के संसाधनों का बेहतर उपयोग करते हुए उनकी आर्थिक स्थिति भी मजबूत हुई है।

कंपनी के इस परियोजना से क्षेत्र में भूजल स्तर बढ़ा है और लंबे समय तक पानी की उपलब्धता बनी रहती है। तालाबों और जल संरचनाओं के पुनर्निर्माण से बारिश का पानी आसानी से संग्रहित होता है, जिससे पानी का बेकार बहना कम होता है। साथ ही आसपास का पर्यावरण संतुलित रहता है। कंपनी पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभा रही है। साथ ही ऐसे प्रयासों से स्थानीय समुदाय के साथ कंपनी का भरोसा और संबंध भी मजबूत होता है, जो भविष्य के लिए सकारात्मक और स्थायी विकास सुनिश्चित करता है।

Hariram Chaurasia

हरीराम चौरसिया, जिन्हें हिंदी पत्रकारिता के क्षेत्र में 34 से अधिक वर्षों का समृद्ध अनुभव है। वे देश के प्रतिष्ठित अखबार 'दैनिक जागरण' सहित अन्य कई प्रतिष्ठित मीडिया हाउस के साथ कार्य कर चुके हैं और निष्पक्ष एवं तथ्यपरक रिपोर्टिंग के लिए जाने जाते हैं।

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