
रायगढ़ । इस वर्ष सीजन की बुआई शुरू होने से पहले किसानों को महंगाई का बड़ा झटका सामने दिखाई देने लगा है। रायगढ़ सहित प्रदेश में बीज, खाद, कीटनाशक, डीजल और मजदूरी दरों में लगातार बढ़ोतरी के कारण खेती की लागत में भारी इजाफा हुआ है। कृषि विशेषज्ञों और किसान संगठनों का कहना है कि इस वर्ष प्रति एकड़ खेती का खर्च पिछले साल की तुलना में 8 से 10 हजार रुपये तक बढ़ सकता है। किसानों के अनुसार डीएपी, एनपीके जैसे उर्वरकों की कीमतों में बढ़ोतरी, डीजल के बढ़े खर्च और कृषि मजदूरी दरों ने खेती को और महंगा बना दिया है। वहीं कई क्षेत्रों में गुणवत्तायुक्त बीज भी ऊंचे दामों पर उपलब्ध हो रहे हैं, जिससे किसानों की चिंता बढ़ गई है।
किसान नेता खेमराज नायक का कहना है कि जब छत्तीसगढ़ में खेती की लागत लगातार बढ़ रही है, तब फसलों के उचित दाम और समय पर कृषि सहायता मिलना बेहद जरूरी है। यदि सरकार किसानों को अतिरिक्त राहत नहीं देती है तो छोटे और सीमांत किसानों पर आर्थिक दबाव और बढ़ सकता है। उन्होंने बताया कि आज किसानों को महंगाई का सामना करना पड़ रहा है। 2022 तक किसानों का आय दुगुनी करने के नाम से आई भाजपा सरकार किसानों को लगातार छल रही है। देश के साथ प्रदेश में भी डीजल के दाम बढ़े हैं, वहीं खाद बीज की कमी से भी किसान जूझ रहा है। इसपर प्रदेश की विष्णुदेव साय सरकार का ध्यान नहीं है।

भाजपा की नाकामी के कारण किसानों को ब्लैक में खाद लेना पड़ रहा है, यह दुर्भाग्य है । किसान हितैषी भाजपा अपने आप को केवल कागजों तक ही समिति कर पा रही है । भाजपा की वास्तविक स्थिति किसानों को दुख दे रही है। उन्होंने बताया कि बीज का दाम भी बढ़ाया हुआ है । किसान भाजपा की नीतियों से बुरी तरह आहत है। उन्होंने भाजपा को किसान विरोधी बताते हुए कहा कि यदि सरकार की स्थिति में बदलाव नहीं हुआ तो किसान भाजपा सरकार को सबक सिखाकर विपक्ष में लाने का काम करेगी।