
रायगढ़, (लक्की गहलोत)। जिला भाजपा के सह प्रवक्ता एवं पूर्व जिला पंचायत सदस्य अशोक अग्रवाल ने कांग्रेस द्वारा डीजल-पेट्रोल की कथित किल्लत को लेकर किए गए धरना प्रदर्शन को पूरी तरह राजनीतिक नौटंकी बताते हुए कहा कि कांग्रेस आज भी आपदा में अवसर खोजने की अपनी पुरानी मानसिकता से बाहर नहीं निकल पाई है। मुट्ठी भर समर्थकों के साथ किया गया यह विरोध प्रदर्शन केवल जनता को भ्रमित करने का असफल प्रयास है।
श्री अग्रवाल ने कहा कि वैश्विक परिस्थितियों और अंतर्राष्ट्रीय संकटों के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत मजबूती से खड़ा है। देश की जनता को केंद्र सरकार की नीयत और नीति पर पूरा विश्वास है। यही कारण है कि हर चुनौतीपूर्ण परिस्थिति में पूरा देश प्रधानमंत्री के साथ खड़ा दिखाई देता है, जबकि कांग्रेस केवल नकारात्मक राजनीति करने में लगी हुई है। उन्होंने कहा कि रायगढ़ में कांग्रेस द्वारा पेट्रोल पंपों में जाकर हो-हल्ला मचाना और कृत्रिम भय का वातावरण बनाना अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है। कांग्रेस अपनी खो चुकी राजनीतिक जमीन और समाप्त हो चुके जनाधार को बचाने के लिए इस प्रकार के प्रायोजित आंदोलनों का सहारा ले रही है, लेकिन जनता अब कांग्रेस की मंशा को भलीभांति समझ चुकी है।
अग्रवाल ने आगे कहा कि कांग्रेसियों की मुख्य तकलीफ रायगढ़ विधायक एवं प्रदेश के वित्त मंत्री ओपी चौधरी की विकासवादी राजनीति है। जिस प्रकार ओपी चौधरी के नेतृत्व में पूरे रायगढ़ जिले में विकास की गंगा बह रही है, उससे कांग्रेस पूरी तरह से बौखला गई है। उन्होंने कहा कि सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य, पेयजल, धार्मिक एवं सामाजिक अधोसंरचना के क्षेत्र में लगातार ऐतिहासिक कार्य हो रहे हैं, जिससे आम जनता का विश्वास भाजपा के प्रति लगातार मजबूत होता जा रहा है। यही कारण है कि जनता के मुद्दों पर पूरी तरह विफल हो चुकी कांग्रेस अब भ्रम फैलाने और अनावश्यक विरोध प्रदर्शन की राजनीति में जुट गई है।
अग्रवाल ने कहा कि जिले की जनता विकास, सुशासन और स्थिर नेतृत्व के साथ है तथा कांग्रेस की भ्रम फैलाने वाली राजनीति को पूरी तरह नकार चुकी है। भाजपा सरकार जनता की सुविधाओं और आवश्यकताओं को लेकर पूरी तरह संवेदनशील है। रायगढ़ की जनता विकास चाहती है, यही कारण है कि पार्टी को जनता का आशीर्वाद लगातार मिल रहा है। मौजूदा स्थिति में कांग्रेस को आत्ममंथन करने की आवश्यकता है, न कि झूठ और भ्रम के सहारे अपनी राजनीतिक जमीन बचाने का प्रयास करने की।